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जानें Mobile Wallet के फायदे और नुकसान

जानें Mobile Wallet के फायदे और नुकसान
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पिछले दिनों हुए इंडिया रिटेल फोरम में बिग बाजार फेम और फ्यूचर ग्रुप के फाउंडर और सीईओ किशोर बियानी ने ऐलान किया कि वे जल्द ही mobile wallet लॉन्च करने वाले हैं। बियानी के मुताबिक अगले 2 सालों में देश में 40 से ज्यादा मोबाइल वॉलेट कंपनियां होंगी। कंपनियां लगातार अपने-अपने मोबाइल वॉलेट लॉन्च कर रही हैं, टीवी पर खूब कमर्शियल्स दिखाई दे रहे हैं, लेकिन ये बताने की की कोई जहमत नहीं उठा रहा कि आखिर ये मोबाइल वॉलेट है क्या ? कैसे करता है ये काम ? क्या यह आपके पैसे खर्च करने का तरीका बदल देगा ? जानें कुछ ऐसे ही सवालों के जवाब…

क्या है Mobile Wallet ?

यह मोबाइल-बेस्ड वर्चुअल वॉलेट है, जिसमें यूजर मोबाइल वॉलेट सर्विस प्रोवाइर के जरिए अकाउंट क्रिएट करके उसमें अमाउंट लोड कर सकते हैं। इस अमाउंट को यूजर ऑनलाइन और ऑफलाइन खर्च कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए मर्चेंट मोबाइल वॉलेट सर्विस प्रोवाइडर के पास लिस्टेड होना चाहिए। एग्जाम्पल के लिए, आप किसी कॉफी शॉप पर गए और वह XYZ मोबाइल वॉलेट के पास लिस्टेड है, तो आप कॉफी का बिल अपने फोन से चुका सकते हैं। यह आपके सर्विस प्रोवाइडर पर निर्भर करता है कि आप एप के जरिए, टेक्स्ट मैसेज से, सोशल मीडिया अकाउंट से या फिर वेबसाइट के जरिए बिल चुका सकते हैं।

इसके जरिए यूजर यूटीलिटी पैमेंट्स से लेकर ई-टेलिंग और ऑफलाइन पैमेंट्स भी कर सकते हैं। यहां तक कि डेली ट्रांजेक्शंस भी आप इससे कर सकते हैं।

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इंडिया में 4 तरह के मोबाइल वॉलेट्स मौजूद हैं…ओपन, सेमी-ओपन, सेमी-क्लोज्ड और क्लोज्ड। ओपन वॉलेट्स से आप सामान और सर्विसेज की खरीदारी कर सकते हैं, एटीएम या बैंक से कैश निकाल सकते हैं और फंड ट्रांसफर कर सकते हैं। ये सर्विसेज बिना बैंक की हिस्सेदारी के संभव नहीं है। जैसे वोडोफोन ने M-Paisa के लिए ICICI बैंक से टाइ-अप किया हुआ है। इसके अलावा मर्चेंट पैमेंट्स करने के साथ ही यूजर इससे किसी भी मोबाइल नंबर बैंक अकाउंट को पैसे ट्रांसफर कर सकता है। वहीं, Airtel Money सेमी-ओपन वॉलेट है, जिससे यूजर केवल उन्हीं मर्चेंट्स के साथ ट्रांजेक्शन कर सकता है, जिसके साथ Airtel ने कॉन्ट्रैक्ट साइन किया हुआ है। सेमी-ओपन वॉलेट में कैश निकालने की फैसिलिटी नहीं है। आप वही अमाउंट खर्च कर सकते हैं, जो आपने लोड किए हैं।

वहीं क्लोज्ड वॉलेट्स ई-कॉर्मस कंपनियों में काफी पॉपुलर हैं। इनमें यूजर एक फिक्स अमाउंट लॉक कर देता है। कैंसिलेशन या प्रोडेक्ट रिटर्न, या गिफ्ट कार्ड्स का अमाउंट मर्चेंट के पास सेव रहता है और पैसा लॉक हो जाता है। यूजर उसी साइट पर ही उस अमाउंट को खर्च कर सकता है। आखिर में सेमी-क्लोड्ज वॉलेट्स में PayTM जैसे सर्विसेज आती हैं, जिनमें यूजर कैश नहीं निकाल सकता, लेकिन सर्विस प्रोवाइड के पास लिस्टेड मर्चेंट्स पर खरीदारी कर सकता है और लिस्टेड लोकेशंस पर फाइनेंशियल सर्विसेज की पैमेंट्स कर सकता है।

क्या होगा अमाउंट लोड करने के बाद?

एक सवाल यूजर के मन में उठ सकता है, कि मोबाइल वॉलेट में अमाउंट क्रेडिट होने के बाद अगर आपने खर्च नहीं किए तो क्या होगा ? इसमें चिंता की कोई बात नहीं है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने मोबाइल-बेस्ड पैमेंट्स सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए कुछ गाइडलाइंस सेट की हुई हैं, जो पूरी तरह से कस्टमर के हित में हैं। आपक पैसे सुरक्षित रहेगा, जैसे बैंक में रहता है। रजिस्टर करने के बाद वॉलेट सर्विस प्रोवाइडर कंपनियां एक एस्क्रो अकाउंट क्रिएट कर देती हैं, जिसमें आपका प्रीलोडेड अमाउंट डिपोजिट होता है। आप जब भी किसी मर्चेंट के पैमेंट करते हैं, तो वह पहले वॉलेट सर्विस प्रोवाइडर के अकाउंट में जाता है, उसके बाद ही मर्चेंट को क्रेडिट होता है। आपके पैसे पर वॉलेट सर्विस प्रोवाइडर का कोई अधिकार नहीं होता।

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हालांकि यह भी सही है कि सभी वॉलेट्स में एस्क्रो अकाउंट की जरूरत नहीं होती। इसके लिए यूजर को रजिस्टर करने से पहले सर्विस प्रोवाइडर से बात कर लेना ठीक रहेगा।

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M-Wallets  Players : Airtel Money, mRupee, Vodafone m-Pesa, Oxigen Wallet, Paytm, Mobikwik, FreeCharge, Novopay, ICICI Pockets

M-WalletsFacts

  • पूरी दुनिया में 29% ऑनलाइन ट्रांजेक्शंस सिर्फ मोबाइल पर होती हैं।
  • सन् 2020 तक दुनिया की 80% अडल्ट पॉपुलेशन के पास स्मार्टफोन होंगे।
  • 2019 तक इंडियन मोबाइल वॉलेट मार्केट की वैल्यू 1,200 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच जाएगी, जो पिछले साल तक 350 करोड़ रुपये थी।
  • 2015 से 2015 तक इंडियन मोबाइल वॉलेट मार्केट 30% की ग्रोथ का अनुमान है।
  • Paytm का दावा है कि हम महीने 8.5 करोड़ लोग उसके मोबाइल वॉलेट के जरिए 700 करोड़ की ट्रांजेक्शन कर रहे हैं।

PROS:

आपका पर्स चोरी हो सकता है या खो सकता है, लेकिन मोबाइल वॉलेट के साथ ऐसा नहीं है। अगर आपका बिल 255.50 रुपये या फिर 552.60 रुपये आया, तो आपको चैंज मांगने की जरूरत नहीं है और न ही कोई आपको चैंज के बदले में टॉफी या कैंडी देने वाला है। इसके अलावा मोबाइल वॉलेट सिंगल टैप पर चलता है, नेट बैंकिंग की तरह कई ब्राउजर खोलने की जरूरत नहीं है, जो काफी टाइम बर्बाद करने वाला होता है। इसके अलावा डिस्काउंट और कैशबैक भी टाइम-टू-टाइम मिलता रहता है।

CONS:

इसका निगेटिव यह है कि केवल मोबाइल सेवी या टैक फ्रेंडली लोग ही इसे हैंडल कर सकते हैं। कही इसका भी M-Commerce जैसा हाल न हो जाए। साथ ही इसके लिए आपके पास हमेशा स्पीडी इंटरनेट कनेक्शन हो। वहीं अभी बेहद कम मात्रा में मर्चेंट्स लिस्टेड हैं, जिसके चलते आप पूरी तरह मोबाइल वॉलेट्स पर डिपेंड नहीं रह सकते। आपको कैश या नेट बैंकिग या डेबिट-क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करना पड़ेगा। इसके अलावा मोबाइल वॉलेट में अमाउंट डिपोजिट करने और खर्च करने (अभी केवल 10,000 रुपये) की लिमिट है। हाई-वैल्यू पैमेंट्स के लिए मोबाइल वॉलेट्स बेकार हैं। सबसे बड़ी बात, फोन सही सलामत रहे, इंटरनेट कनेक्शन चलता रहे और बैटरी हमेशा फुल रहे। पता चले कि पैमेंट करने जा रहे हों और बैटरी डाउन है, तो वन-टैप पैमेंट भी नहीं हो पाया।

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Author is Famous Technology and Automobile Journalist worked with esteemed Daily News Papers.

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